Sunday, May 10, 2020
Mother's day का इतिहास और परम्परा!
Wednesday, April 22, 2020
आत्मनिरीक्षण/ Self Enquiry
आत्मनिरीक्षण क्या है?
जब तक हम जीवित रहते हैँ, हर क्षण कार्य में लगे रहते हैं, वे चाहे अच्छे हों या बुरे । प्रत्येक दिन हमने सुबह से लेकर शाम तक क्या-क्या अच्छा और क्या-क्या बुरा कार्य किया और उन्हें करने से हमें वया लाभ और क्या हानि हुईं? हमने क्यब्व-क्या नहीं किया और उसे नहीं करने से क्या-वया लाभ और हानि हमें हुई? यह सबकुछ देखना ही आत्मनिरीक्षण है । इम बात क्रो यूं समझें कि अपने सभी गुगब्ब-दोषों, अच्छाईयों-बुरग़इयों, शुभ-अशुभ विचारों, वाणी और शरीर के कार्यों का स्मरण करना ही आत्मनिरीक्षण है । अपने मन को देखना, अपनी संवेदनाओं क्रो देखना, अपने क्रिया कलापों को देखना और अपनी स्मृतियों क्रो भी देखना, इन सबको साक्षी भाव से देखना आत्म निरीक्षण है । इसके माध्यम से हम अपनी वास्तविक वर्तमान स्थिति का परिचय प्रात करते हैं कि अभी हमृ उत्थान की ओर अग्रसर हो रहे हैं या पता कौ ओंर । एक शिविरार्थी के लिए भी आत्म निरीक्षण के माध्यम से यह जानना जरूरी होता है कि इतनी दूर से शिविर में आकर, इतने अनुशासन में रहते हुए उसने जो तपस्या र्का है, इतना सारा समय अपनी आदर्श दिनचर्या को पूरी करने में लगाया है, तो इससे उसे आज क्या नई उपलब्धि प्राप्त हुई ९" एक छोटा सा व्यापारी जो दिनभर अपना व्यापार करता है, रात को दुकान बंद करने से पहले बो भी यह जरूर देखता है कि मैँने आज कुछ कमाया है या नहीं ? अगर कमाया है तो वो कमाया हुआ धन आज के लिए पर्याप्त था या नहीं ? अथवा आज कुछ घाटा तो नहीं हुआ? जैसे एक व्यापारी अपने लाभ या नुकसान का ध्यान रखता है, वैसे ही एक किसान भी यह देखता है कि फसल पाने हेतु जो बीज उसने बोये हैं, बो ठोक तरह से ऊग रहे हैं या नहीं ? इसी तरह से लौकिक क्षेत्र में भी हर जगह, हर व्यक्ति इस बात कौ विशेष तौर पर देखता है । इस तरीके से अवलोकन करना, देखना, जाँचना, परखना उसके जीवन की सफलता के लिए है । वह अगर दैनिक हिसाबकिताब की जाँच नहीं करेगा, वही-खाते तैयार नहीं करेगा, तो उसके लिये अपने प्रत्येक काम क्रो और अच्छे ढंग से करना संभव ही नहीं होगा । संदेश यही है कि प्रतिदिन 18 घटै काम करने का आउटपुट (प्राप्ति) जाने बिना, उस व्यापारी के किसी भी कार्य में और उसके जीवन में किसी भी प्रकार की कोई प्रगति भी नहीं हो सकेगी ।
व्यापार हो या पढाई, कार्य कोई भी हो, सुचारू रूप से सबका लेखा जोखा आँर मापतौल रखना अति आवश्यक होता है । बिना इसके उसका व्यापार चौपट हो जाएगा । क्योंकि उसे पता ही नहीं चलेगा कि कौन सा व्यापार करने में कितना नुकसान हुआ, और वह नुकसान क्यों हुआ ? जिस प्रकार लौकिक क्षेत्र में प्रगति करने के लिए अपना दैनिक लेखा-जोखा रखना अति आवश्यक है । ठीक इसी तरह से अध्यात्म के क्षेत्र में भी प्रगति करने केलिए स्वयं के द्वारा प्रतिदिन, प्रतिपल किए जा रहे कर्मों का लेखा-जोखा रखना, अपने क्रियाकलापों पर बारीक नज़र रखना, अपने गुण-दोषों, अच्छाई -बुरइं क्रो ढूंढ़ना हमारे लिए अत्यन्त आवश्यक होता है और इसी को आत्मनिरीक्षण कहते हैं । आत्म निरीक्षण रूपी कसौटी पर स्वयं को कसने पर ही पता चलत है कि इस मानव संसार रूपी व्यापार मंडी में हम ऊँचे उठ रहे है या नीचे गिर रहे है और तभी हम वास्तविक ऊंचाइयों को छूने केे लिए भी कर सकेंगें।
इस लेख को पढ़ने के लिए आपका बहुँत बहुँत धन्यवाद।
Thursday, April 16, 2020
हम तो अपने दुश्मन को ऐसी सजा देते है।
Wednesday, April 15, 2020
आर्य कौन है?
हमारा नाम आर्य है , हिन्दू नहीं
वेद शास्त्र मनुस्मृति, उपनिषदु रामपुयण महाभारत, गीता आदि सभी प्राचीन ग्रन्धों में आर्यचाब्द ही मिलता है, हिन्दू नहीं । संस्कृत कै कोष शब्दकल्पदुम में आर्य शब्द कै अर्थ-मूज्य, श्रेष्ठ, धार्मिक, उदार न्यायकारी मेहनत करने _चाला आदि किये है । आर्यव्रता विसृजन्तो अयि क्षमि। (ऋरबेद) "अर्थआर्य चे कहलाते हैँ जो सत्य, न्याय, अहिसां, पवित्रता, परोपकार, पुरुषार्थ आदि शुभ काम करते हैं। ५ कृपवन्तो विश्वमार्यंम्। (ऋग्वेद) अर्थ-सरि संसार क्रो आर्य ( श्रेष्ठ) -बनाआं । र अनार्य इति मामार्या: पुत्रं विक्रायर्क ध्रुवम्। (बाल्मीकि रामायण )
अर्ध-(रांजा दशरथ राम को -वन में भेजना न चाहते थे) वे कहते हैँ-३आर्य लोग
(सज्जन) मुझें पुत्र बेचने वाले क्रो निश्चय ही अनार्य (दुष्ट) ५ बताएंगे। महाभारत में आर्य शब्द वाले जो षलोक पाये जाते हैं, उनमें ' आर्य ' शब्द का अर्य है-जो शान्तत्रुए वैर क्रो नहीं बढाता, जो अभिमान नहीं करता, जो निराश नहीं ढोता, जोपुपुसीबत में भी पाप नहीं करता; जो "सुखी होने पर बहुत अधिक ग्रसन्नता की दिखाता, जो दूसरों कै दु .ख में कभी " प्रसन्त नहीं होता, जो कायर नहीं है और तो दान देकर पश्चात्ताप नही करता। .
दिन्दू शब्द मुसलमानों ने घृणा कै रूप में हमें दिया है। यह फारसी भाषा कां शब्द दै। फारसी भाषा के शब्द कोश में ' दिन्दू का अर्थ है-चौर डाकू गुस्सा काफिर, काला आदि। मुसलमान आक्रमणकारी "जब भारत में आए उन्होंने यहाँ कै लोगों को लूटा, मारा क्या पकड का गुलाम बनाकर अपने साथ अपने देश में ले गण वहां रो जाकर उनसे अनाज पिसवाया, घास खुदवाया, मल-मूत्र आदि उठवाथा क्या
ब्लाज़श्यों मैं बेचा। तब उन्होंने यहाँ कै लोगों क्रो ' हिन्दू नाम दिया । आठंवीं _सदी से पहले यानि कि मुसलमानो कै आने से पहले भारतवर्ष में हिन्दू शब्द का प्रचलन न था सब जगह आर्य और आर्यावर्त शब्द ही प्रसिद्ध थे। चीनी यात्री ह्यूनसाग भारत मे सातवी सदी मॅ (सत् ६३१ से ६४५ तक) आया था। वह इस देश का नाम आएँर्य देश लिखता है।
महर्षि दयानन्द सरस्वती कै उदूगार-सज्जन । अब हिन्दू नाम हूँका त्याग करो औंर 'आर्य' तथा आर्यावर्त ' इन नामों का अभिमान करो । गुणं भ्रष्ट हेम लोग हुए, परन्तु नाम भ्रष्ट तो हमे न होना चाहिये।
सत् १८७० मॅ काशी मॅ टेढा नीम नामक स्थान पर कांशी कै राजा कै अधीन एक धर्मसभा हुई। सभा" सें विश्वनाथ शर्मा बाबा शास्वी आदि ४५ विद्वानों ने बिचार विमर्श कै बाद यह व्यवस्था दी श्री क्रि "हिन्दू नाम हमारा नही है यह मुसलमानो की भाषा का है और इसका अर्थ है अधर्मी। अत इसे कोई स्वीकार न करे।
हिन्दु-शब्दों हि यत्ननेषु अधर्मीजन बोधक. । अतो नाहर्लि तत् शब्द बीध्यता सकलो जन । ।
Wednesday, April 8, 2020
क्या हनुमान जी बन्दर थे? क्या वानर का मतलब बन्दर होता है?
Wednesday, March 25, 2020
Happy New Year
Wednesday, January 15, 2020
मकर (माघे) संक्रान्ति (माघी ) (माघ-विहु)को हार्दिक शुभकामना सहित....
मकर संक्रान्ति पर्वको महत्वलाई जानेर श्रद्धापूर्वक मनाऔं..!
मकर संक्रान्तिको पर्व प्रत्येक वर्ष माघ १गते देशभरि हरेकले आ-आफ्नै तरिकाले मनाउने गरिन्छ। आजभोलि हामीले पर्व त मनाउँछौं तर धेरैलाई कुनै पर्वको महत्व र त्यस सङ्ग जोडिएको घटनाहरुको ज्ञान हुँदैन। अतः त्यसैले हरेक पर्वको सबै पक्षको बारेमा संक्षेपमा जान्नु आवश्यक छ।
मकर संक्रान्ति पर्वको पहिलो महत्व हाम्रो सौर्यमण्डल तथा मकर राशि सङ्ग सम्बन्धित छ। हामीलाई थाहा छ कि पृथिवीको दुई प्रकारको गति हुन्छ- एक यो आफ्नो अक्षमा घुम्छ र दोस्रो गतिमा पृथ्वीले सूर्यको ओरिपरी परिक्रमा गर्दछ जुन एक वर्षमा पूरा हुन्छ। एउटा परिक्रमाको काल वा समयलाई सौर्यवर्ष भनिन्छ। पृथिवीले सूर्यको परिक्रमा गर्ने जुन पथ हुन्छ त्यो केहि लाम्चो (वृत्ताकार) हुन्छ।
पृथ्वी मकर संक्रान्तिका दिन देखि हिँडेर पुनः यहि स्थानमा आइपुग्ने तथा सूर्यको पूरा एक फन्को मार्ने मार्ग वा परिधिलाई ‘‘क्रान्तिवृत्त” भनिन्छ। वैदिक ज्योतिषि शास्त्र द्वारा यो क्रान्तिवृत्तका १२ भाग कल्पित गरिएको छ र ति १२ भागहरुको नाम ति स्थानहरुमा आकाशका नक्षत्रपुंज सङ्ग मिलेर बनेका केहि मिल्दा-जुल्दा आकृति भएका पदार्थहरुको नाममा राखिएको छ। ति १२ नाम हुन्- मेष, वृष, मिथुन, कर्कट, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुम्भ र मीन।
क्रान्तिवृतमा कल्पित प्रत्येक भाग तथा नक्षत्रपुंजहरुको आकृतिलाई “राशि” भनिन्छ। पृथिवी जब एक राशि बाट अर्को राशिमा प्रवेश तथा संक्रमण गर्दछ त्यस संक्रमणलाई नै “संक्रान्ति” भनिन्छ। लोकाचारमा पृथिवीको संक्रमणलाई सूर्यको संक्रमण भन्न थालिएको छ। मकर संक्रान्तिको अर्थ सूर्य मकर संक्रान्तिका दिन मकर राशिमा प्रवेश गर्दछ। ६ महीना सम्म सूर्य क्रान्तिवृत देखि उत्तर तिर देखिन्छ र ६ महिना सम्म दक्षिण तिर। यिनै ६ महिनाको अवधिको नाम ‘अयन’ हो।
सूर्य उत्तर तिर उदय हुने ६ महिनाको अवधिको नाम ‘उत्तरायण’ र दक्षिण तिर देखिने अवधिको नाम ‘दक्षिणायन’ हो। उत्तरायण कालमा सूर्य उत्तर तिर बाट उदय भएको जस्तो देखिन्छ र यसमा दिनको समय बढ्दै जान्छ र रातको समय घट्दै जान्छ। दक्षिणायनमा सूर्योदय क्रान्तिवृत्तको दक्षिण तिर बाट उदय भएको जस्तो दृष्टिगोचर हुन्छ र यसमा दिनको समयावधि घट्छ र रात्रिको अवधिमा वृद्धि हुन्छ।
सूर्य जब मकर राशिमा प्रवेश गर्दछ वा संक्रान्त हुन्छ तब उत्तरायणको आरम्भ हुन्छ र कर्कट राशिमा प्रवेश भए पछी दक्षिणायनको आरम्भ भएको मानिन्छ। यी दुई अयनहरुको अवधि ६/६ महिनाको हुन्छ। उत्तरायणमा दिन लामा र रात छोटा हुनाले पृथिवीमा प्रकाशको अधिकता हुन्छ त्यसैले यो उत्तरायण कालको महत्व दक्षिणायन भन्दा अधिक मानिएको हो।
उत्तरायणको महत्वको आरम्भ मकर संक्रान्ति देखि हुने भएकोले मकर संक्रान्ति (माघ १ गते) को दिनलाई अधिक महत्वपूर्ण मानिन्छ र यसलाई पर्वको रूपमा मनाइने प्रथा परापूर्व काल देखि चली आएको छ। यो पनि जानकारी दिहालौं- ज्योतिष शास्त्रका विद्वानहरु भन्दछन् कि उत्तरायणको आरम्भ त मकर संकान्तिका दिन भन्दा पहिले देखि नै हुन्छ तर मकर संक्रान्तिको पर्वमा नै दुवै पर्व एक साथ मनाइने परम्परा चलिआएको छ। भविष्यमा यिनलाई अलग अलग तिथिमा मनाउनका लागि विचार पनि गर्न सकिने छ।
चाहे जेहोस्, यो पर्व मनाउनुको मुख्य उद्देश्य मकर संक्रान्तिको ज्ञान र ६ महिने उत्तरायणको आरम्भ सङ्ग छ जसबाट हाम्रा पूर्वजहरुको ज्योतिष विषयक ज्ञान र रुचि सङ्ग परिचित हुन सकियोस्।
क्रमशः...
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